केरल में हुई गोहत्या के विरोध में जगद्गुरु शंकराचार्य


केरल में हुई गोहत्या के विरोध में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वतीजी का मधुपुर,झारखण्ड से राजनैतिक दलों को चुनोती…
मूर्तिभंजको के शासनकाल में श्रीजगन्नाथ आदि का दर्शन सुलभ नहीं था , भगवत्पाद शंकराचार्य महाभाग ने २५०० वर्ष पूर्व वैशाख शुक्ल पंचमी के दिन अपने चिन्मय करकमलों से श्री जगन्नाथ आदि को पुनः प्रतिष्ठित किया !

बदरीवन में श्री बदरीनाथजी का दर्शन सुलभ नहीं था – जिन्होंने अपने चिन्मय करकमलों से बदरीनाथ जी को पुनः प्रतिष्ठित किया – भारत को पुनः वृहद् भारत का रूप जिन्होंने दिया – भारत को सुरक्षित , मठमंदिरों को सुरक्षित रखने के उन आदिशंकराचार्य ने क्या नहीं किया और बौद्धिक धरातल पर उन्होंने जो दर्शन दिया , भाष्य दिया उस पर पूरा विश्व ही नहीं , सारे वैज्ञानिक भी लट्टू है !

जिस प्रान्त में आदिशंकराचार्यजी ने जन्म लिया – उस प्रान्त के दीवाने , राजनैतिकदल के उद्दण्ड युवक घोषणा पूर्वक सबके सामने गाय को काटते है तो हम कैसे समझें भारत स्वतंत्र है , कोई भी हो , कोई राजनैतिकदल हो जिसे भारत में गोहत्या प्यारी है , उस राजनेता को , उस राजनैतिकदल पर प्रतिबन्ध लगना चाहिए , उसे चुनाव लड़ने का ही नहीं भारत में रहने का अधिकार भी नहीं मिलना चाहिए , ऐसे अत्याचारियों को हम नहीं सह सकते !

और उलटी बात – गोभक्तो को गुण्डा कहा जाता है और और गोहत्यारों को राष्ट्रभक्त कहा जाता है !

जो राजनेता , जो नागरिक , जो राजनैतिकदल गुप्त या प्रकट रूप से गोहत्या का समर्थन करते है – उन्हें भारत की नागरिकता से वंचित करना चाहिए वह भारत का नागरिक नहीं देशद्रोही है , उन्हें भारतमें रहने का अधिकार नहीं !

अब हम उस नीति को जन्म देंगे – जहाँ शांतिपूर्वक , मानवाधिकार की सीमा में , जहाँ गोभक्तो की विजय होगी , गोवंश की रक्षा होगी , बंगाल में हमारे मानबिदुओं की रक्षा होगी !

भारत स्वतंत्र है क्या ??

भारत की शिक्षा पद्धति हमारी अपनी नहीं , रक्षा की प्रणाली हमारी अपनी नहीं , भारत में कृषि , गोरक्ष , वाणिज्य के प्रकल्प हमारे अपने नहीं , सेवा के प्रकल्प , उद्धोग के प्रकल्प हमारे अपने नहीं है और धीरे धीरे ब्राहमण , क्षत्रिय , वैश्य व् शुद्र के बीज भी अब हमारे अपने रहने वाले नहीं है , इससे घोर दासता , परतंत्रता और क्या हो सकती है !

आप यह मत समझिये कि हम मौन है , हम कौन है ?

एक समय हमने नारद के रूप में हिरन्यकशीपु को रसातल में पहुँचाने के लिए उसी के बेटे प्रहलाद को खड़ा किया , यह हमारी परंपरा है !

एक समय हमने भृगु महर्षि के रूप में बेन के आतंकपूर्ण शासन को उच्छिन्न करके पृथु को राजा बनाया था !

हम वो है जिसने वशिष्ठ के रूप में अत्याचारों को ख़त्म करने के लिए , रावण को रसातल में पहुँचाने के लिए भगवान् राम को प्रकट किया था !

हम वो है जो धौम्यऋषि के रूप में , मैत्रेयऋषि के रूप , वेद व्यासजी के रूप में श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर को प्रकट करके कंस और दुर्योधन के शासन को रसातल में पहुँचाया , हमने चाणक्य के रूप में चन्द्रगुप्त को आगे करके अभिमानियो के शासन को उच्छिन्न किया !

आज भी व्यासपीठ में वह बल है , वह सामर्थ्य है !

मै फिर घोषणा करता हूँ जिसको गोहत्या प्यारी हो , वो किसी प्रान्त के मुख्यमंत्री हो , भारत का प्रधानमंत्री रहा हो या हो , मै नहीं जानता – अगर गोहत्या का कोई गुप्त या प्रकट समर्थक है – भारत को खाली करें , उसे भारत की नागरिकता नहीं मिलनी चाहिए , जो गति वह गायों को दे रहा है , वह गति उसे मिलनी चाहिए और अगर ऐसा नहीं होता है तो भारत गोभक्तो का होगा , गंगा के भक्तो का होगा , आर्यों का होगा , सैद्धांतिक तौर पर भारत की रक्षा होगी !

!! हर हर महादेव !!