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स्वस्थ क्रान्तिकी उद्भावना

प्रिय पाठकवृन्द! सस्नेह स्मरण। भारत सैद्धान्तिक धरातलपर स्वतत्र नहीं है। देशके मौलिक और प्रशस्त स्वरूपको ख्यापित करना स्वतन्त्रताका लक्ष्य है। सनातन वैदिक आर्यसिद्धान्त दार्शनिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक धरातलपर इस महायान्त्रिक युगमें भी सर्वोत्कृष्ट है। वेदविहीन विज्ञान देहात्मवादका पोषक,पर्यावरणका प्रदूषक तथा अत्यन्त विस्फोटक है। भारत अपनी मेधाशक्ति, रक्षाशक्ति,वाणिज्यशक्ति और श्रमशक्तिका सदुपयोग करनेमें अक्षम है। व्यक्ति, वर्ग […]

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Memorandum of Aditya Bahinee to the Hon’ble Chief Minister

“ଶ୍ରୀ ହରି” ଶ୍ରୀ ଗଣେଶାୟ ନମଃ । ଜଗଦ୍‌ଗୁରୁ ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ସ୍ବାମୀ ନିଶ୍ଚଳାନନ୍ଦ ସରସ୍ବତୀ ମହାରାଜଙ୍କ ଦ୍ବାରା ଗଠିତ ସର୍ବଭାରତୀୟ ସେବା ସଂସ୍ଥା “ଆଦିତ୍ୟ ବାହିନୀ” ଓଡିଶା ଶାଖା ତରଫରୁ ଜଗଦ୍‌ଗୁରୁ ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ତଥା ଗୋବର୍ଦ୍ଧନ ମଠ(ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ପୀଠ) ପ୍ରତି ସରକାରଙ୍କ ନିମ୍ନୋକ୍ତ ଅବହେଳା ପୂର୍ବକ ଦମନ ନୀତି ବିରୁଦ୍ଧରେ ରାଜ୍ୟବ୍ୟାପୀ ପ୍ରତିବାଦର ସ୍ବର ଉତ୍ତୋଳନ ପାଇଁ ସ୍ଥିର କରାଯାଇଛି । ୧. ଓଡିଶା ଜନସାଧାରଣ ଜଗନ୍ନାଥ ସଂସ୍କୃତି ଓ ପରମ୍ପରା ସହିତ ଜଡିତ ଥିବାବେଳେ ୨୫୦୦ […]

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शंकराचार्य जी का शासनतंत्र को निर्देश

किसानों द्वारा आत्महत्या के सन्दर्भ में पूरी शंकराचार्य जी का शासनतंत्र को निर्देश सद्भावपूर्ण सम्वाद के माध्यम से सैद्धान्तिक सामंजस्य साधने में शासनतंत्र की असमर्थता के कारण किसान आत्महत्या करने के लिए बाध्य होते हैं और उग्र आंदोलन कर मृत्यु के ग्रास बनते हैं । शासनतंत्र का यह दायित्व है कि, वह राष्ट्र के उत्कर्ष […]

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श्री जगदीश रथयात्रा एवं चातुर्मास्यव्रत-निमंत्रण पत्र

श्री जगदीश रथयात्रा एवं चातुर्मास्यव्रत-निमंत्रण पत्र गोवर्धन मठ पुरीपीठ, श्री शंकराचार्य मार्ग,पूरी,ओडिशा सम्माननीय सन्त तथा भक्तवृन्द, सस्नेह स्मरण तथा सादर अभिनंदन ! निम्नलिखित कार्यक्रमोंमें आप सादर तथा सानन्द आमंत्रित हैं । श्री जगदीश्वर रथयात्रा महोत्सव विदित हो कि इस वर्ष श्री बलभद्र और भगवती शुभद्रासहित महाप्रभु श्रीजगन्नाथजीकी रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया,वि.सं.२०७४ रविवार  तदनुसार 25th June-2017 को […]

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केरल में हुई गोहत्या के विरोध में जगद्गुरु शंकराचार्य

केरल में हुई गोहत्या के विरोध में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वतीजी का मधुपुर,झारखण्ड से राजनैतिक दलों को चुनोती… मूर्तिभंजको के शासनकाल में श्रीजगन्नाथ आदि का दर्शन सुलभ नहीं था , भगवत्पाद शंकराचार्य महाभाग ने २५०० वर्ष पूर्व वैशाख शुक्ल पंचमी के दिन अपने चिन्मय करकमलों से श्री जगन्नाथ आदि को पुनः प्रतिष्ठित किया ! […]

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