स्वस्थ क्रान्तिकी उद्भावना

प्रिय पाठकवृन्द!

सस्नेह स्मरण।

भारत सैद्धान्तिक धरातलपर स्वतत्र नहीं है। देशके मौलिक और प्रशस्त स्वरूपको ख्यापित करना स्वतन्त्रताका लक्ष्य है। सनातन वैदिक आर्यसिद्धान्त दार्शनिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक धरातलपर इस महायान्त्रिक युगमें भी सर्वोत्कृष्ट है। वेदविहीन विज्ञान देहात्मवादका पोषक,पर्यावरणका प्रदूषक तथा अत्यन्त विस्फोटक है।

भारत अपनी मेधाशक्ति, रक्षाशक्ति,वाणिज्यशक्ति और श्रमशक्तिका सदुपयोग करनेमें अक्षम है। व्यक्ति, वर्ग और राष्ट्रको बाजारका सौदा बनानेमें दक्ष भारत अपने अस्तित्व और आदर्शकी रक्षा करनेमें सर्वथा असमर्थ सिद्ध है। ऐसी स्थितिमें शिक्षा, रक्षा, न्याय, कृषि, गौरक्ष्य, वाणिज्यके सनातन प्रकल्पको समझने और क्रियान्वित करनेकी आवश्यकता है।

धार्मिक और आध्यात्मिक नेतृत्वविहीन स्वतन्त्र भारतका शासनतत्र सत्तालोलुपता और अदूरदर्शिताके चपेटमें पड़कर तथा विविध तन्त्रोंके षड्यत्रका और अन्धानुकरणका ग्रास बनकर विकासके नामपर गोवंश, गङ्गा, सती, संस्कृति आदि सर्वहितप्रद प्रशस्त मानबिन्दुओंका विघातक सिद्ध हो रहा है।

ऐसी स्थितिमें सर्वहितकी भावनासे परस्पर सद्भावपूर्ण सम्वादके माध्यमसे सैद्धान्तिक निष्पत्ति प्राप्तकर स्वस्थ क्रान्तिको उद्भासित करनेकी आवश्यकता है।

 

भवदीय

 

स्वामी निश्चलानन्दसरस्वती

पुरी

ओडिशा (भारत)

22.7.2017

Memorandum of Aditya Bahinee to the Hon’ble Chief Minister

“ଶ୍ରୀ ହରି”

ଶ୍ରୀ ଗଣେଶାୟ ନମଃ ।

ଜଗଦ୍‌ଗୁରୁ ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ସ୍ବାମୀ ନିଶ୍ଚଳାନନ୍ଦ ସରସ୍ବତୀ ମହାରାଜଙ୍କ ଦ୍ବାରା ଗଠିତ ସର୍ବଭାରତୀୟ ସେବା ସଂସ୍ଥା “ଆଦିତ୍ୟ ବାହିନୀ” ଓଡିଶା ଶାଖା ତରଫରୁ ଜଗଦ୍‌ଗୁରୁ ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ତଥା ଗୋବର୍ଦ୍ଧନ ମଠ(ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ପୀଠ) ପ୍ରତି ସରକାରଙ୍କ ନିମ୍ନୋକ୍ତ ଅବହେଳା ପୂର୍ବକ ଦମନ ନୀତି ବିରୁଦ୍ଧରେ ରାଜ୍ୟବ୍ୟାପୀ ପ୍ରତିବାଦର ସ୍ବର ଉତ୍ତୋଳନ ପାଇଁ ସ୍ଥିର କରାଯାଇଛି ।

୧. ଓଡିଶା ଜନସାଧାରଣ ଜଗନ୍ନାଥ ସଂସ୍କୃତି ଓ ପରମ୍ପରା ସହିତ ଜଡିତ ଥିବାବେଳେ ୨୫୦୦ ବର୍ଷ ତଳେ ଆଦି ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟଙ୍କ ଦ୍ବାରା ମହାପ୍ରଭୁ ଶ୍ରୀ ଜଗନ୍ନାଥଙ୍କ ମନ୍ଦିର ପୁନରୁଦ୍ଧାର ହୋଇଥିବା ବେଳେ ତାଙ୍କର ଦାୟାଦ ଭାବେ ବର୍ତ୍ତମାନର ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ଓ ତାଙ୍କ ପୀଠକୁ ଅବହେଳା ଓ ଅବମାନନା କରିବାରେ ରାଜ୍ୟ ସରକାରଙ୍କ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ କଣ?

୨. ସନାତନ ହିନ୍ଦୁ ଧର୍ମର ସୁରକ୍ଷା ତଥା ରାଜନୀତି ଅନୁଯାୟୀ ସର୍ବୋଚ୍ଚ ଧର୍ମଗୁରୁ ଜଗଦ୍‌ଗୁରୁ ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟଙ୍କ ମାର୍ଗଦର୍ଶନରେ ଶ୍ରୀମନ୍ଦିର ପ୍ରଶାସନ ପରିଚାଳିତ ହେବା କଥା,ମାତ୍ର ରାଜ୍ୟ ସରକାର ଶ୍ରୀମନ୍ଦିର ପ୍ରଶାସକଙ୍କ ଉପରେ ସମସ୍ତ ଦାୟିତ୍ବ ଦେଇ ଜଗଦ୍‌ଗୁରୁଙ୍କୁ ଅବମାନନା କରିବା ଦ୍ବାରା ଶ୍ରୀ ଜଗନ୍ନାଥ ମନ୍ଦିରରେ ବିଭିର୍ନ୍ନ ସମୟରେ ବିଶୃଙ୍ଖଳା ସୃଷ୍ଟିକରି ଭକ୍ତମାନଙ୍କର ଜଗନ୍ନାଥ ମହାପ୍ରଭୁଙ୍କ ଠାରୁ ଆସ୍ଥା ବିଶ୍ବାସ ହରାଇବା ପାଇଁ ଚକ୍ରାନ୍ତ ପଛରେ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ କଣ?

୩. ସନାତନ ଧର୍ମର ସର୍ବୋଚ୍ଚ ଧର୍ମଗୁରୁ ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟଙ୍କ ପୀଠକୁ ପର୍ଯ୍ୟଟନ ମାନଚିତ୍ରରେ ସ୍ଥାନିତ ନ କରିବା ପଛରେ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ କଣ?

୪. ପୁରୀ ସହରରେ ଥିବା ସମସ୍ତ ମଠ ମନ୍ଦିରକୁ ରାଜ୍ୟ ସରକାର ଶ୍ରୀମନ୍ଦିର ପରିଚାଳନା ସମିତି ମାଧ୍ୟମରେ ଧ୍ବଂସ କରି ଆବାହମାନ କାଳରୁ ପ୍ରତିଷ୍ଠିତ ମଠ ମନ୍ଦିରର ମହାନ୍ ସଂସ୍କୃତିକୁ ଲୋପ କରିବା ପଛରେ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ କଣ?

୫. ସନାତନ ହିନ୍ଦୁ ଧର୍ମକୁ ଛାଡି ଖ୍ରୀଷ୍ଟିୟାନ୍,ମୁସଲ୍‌ମାନ୍,ଶିଖ୍ ଓ ବୌଦ୍ଧ ଧର୍ମଗୁରୁ ମାନଙ୍କ ମଠ କିମ୍ବା ମନ୍ଦିର ପ୍ରତି ସରକାର ଏଭଳି ଆଚରଣ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରିପାରିବେ କି?

୬. ସ୍ବର୍ଗଦ୍ବାର ଜମି ଦୁର୍ନୀତିର ମାମଲା ଖୋଳତାଡ ଆରମ୍ଭ ହେବା ପରେ ସରକାର ସେଥିପ୍ରତି କାର୍ଯ୍ୟାନୁଷ୍ଠାନ ଗ୍ରହଣ ନ କରି ଆକ୍ରୋଶ ମୂଳକ ଗୋବର୍ଦ୍ଧନ ମଠ ତଥା ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟଙ୍କ ପୀଠର ସମସ୍ତ ଜମି(୧୧ ଏକର ପାଖାପାଖି) କୁ ଶ୍ରୀମନ୍ଦିର ପରିଚାଳନା କମିଟି ନାମରେ ରେକଡ୍‌ଭୁକ୍ତ କରି ଜଗଦ୍‌ଗୁରୁ ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟଙ୍କୁ ଦମନ କରିବା ଚକ୍ରାନ୍ତର କାରଣ କଣ?

୭. ୧୮୯୯ ମସିହାଠାରୁ ପୁରୀ ଗୋବର୍ଦ୍ଧନ ମଠର ଜଗଦ୍‌ଗୁରୁ ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ଉପରୋକ୍ତ ଜମିର ମାର୍ଫତ୍ ଥିବାବେଳେ ୧୯୯୩ ମସିହାଠାରୁ ସ୍ଥିତିବାନ୍ ସତ୍ତ୍ବ ସହ ରେକଡ୍‌ଭୁକ୍ତ ଜମିକୁ ଶ୍ରୀମନ୍ଦିର ପରିଚାଳନା ସମିତିକୁ ଷଡଯନ୍ତ୍ର ପୂର୍ବକ ହସ୍ତାନ୍ତର କରିବା ପଛରେ ସରକାରଙ୍କ ଆଭିମୁଖ୍ୟ କଣ?

୮. ପୂର୍ବ ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ମାନଙ୍କ ୧୩୧ଟି ସମାଧି ମଧ୍ୟରୁ ୧୨୦ଟି ହୋଟେଲ୍,ଲଜିଂ,ବ୍ୟବସାୟିକ ଅନୁଷ୍ଠାନ ତଳେ ପୋତି ହୋଇ ରହିଥିବା ବେଳେ ୧୧ଟି ସମାଧି ଅଣନିଶ୍ବାସ ଅବସ୍ଥାରୁ ଉଦ୍ଧାର କରିବା ଯେଉଁ ଜମି ମଠର ବିଜେସ୍ଥଳୀ ମାଁ ବିମଳା ମନ୍ଦିର, ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟଙ୍କ ନିବାସ,ବେଦ ଅଧ୍ୟୟନରତ ଛାତ୍ରାବାସ,ଗୋଶାଳା ଅବସ୍ଥିତ ୫ଏକର ୭୬୩ ଡେ.ମି ଜମି ଗୋବର୍ଦ୍ଧନ ମଠ ହାତରୁ ଶ୍ରୀମନ୍ଦିର ପ୍ରଶାସନ ସମିତି ଅଧିକାରକୁ ନେବାର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ କଣ?

୯. ୨୫୦୦ ବର୍ଷ ତଳେ ଆଦି ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟଙ୍କ ଦ୍ବାରା ପ୍ରତିଷ୍ଠିତ ୪ଟି ମଠ(ଭାରତର ପୂର୍ବ ଭାଗ ଓଡିଶା ପ୍ରଦେଶ ଠାରେ ଗୋବର୍ଦ୍ଧନ ମଠ, ପଶ୍ଚିମ ଭାଗ ଗୁଜୁରାଟ ପ୍ରଦେଶ ଦ୍ବାରିକା ଠାରେ ଶାରଦା ମଠ, ଉତ୍ତର ଭାଗ ଉତ୍ତରାଖଣ୍ଡ ପ୍ରଦେଶ ବଦ୍ରିନାଥ ଠାରେ ଯୋଶୀ ମଠ ଏବଂ ଦକ୍ଷିଣ ଭାଗ କର୍ଣାଟକ ପ୍ରଦେଶ ରାମେଶ୍ବର ଠାରେ ଶୃଙ୍ଗେରି ମଠ) ମଧ୍ୟରୁ ଓଡିଶା ସରକାରଙ୍କ ବ୍ୟତୀତ ଅନ୍ୟ ରାଜ୍ୟମାନଙ୍କର ସରକାର ଦେବୋତ୍ତର ଆଇନ୍ ବା ବିଭାଗରୁ ମୁକ୍ତ ରଖି ସ୍ବତନ୍ତ୍ର ମାନ୍ୟତା ଦେଇ ସ୍ବୟଂ ଶାସିତ ଅବସ୍ଥାରେ ରଖିଥିବା ବେଳେ ଓଡିଶା ସରକାର ଗୋବର୍ଦ୍ଧନ ମଠ ତଥା ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟଙ୍କ ପୀଠର ଅସ୍ଥିତ୍ବ ଲୋପ୍ କରିବା ଚକ୍ରାନ୍ତର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ କଣ?

ଆସନ୍ତା ତା ୧୩.୦୬.୧୭ ରିଖରେ “ଆଦିତ୍ୟ ବାହିନୀ” ତରଫରୁ ରାଜ୍ୟର ସମସ୍ତ ଜିଲ୍ଲା ସଦର ମହକୁମାରେ ଶାନ୍ତିପୂର୍ଣ୍ଣ ପଦଯାତ୍ରା କରି ଜିଲ୍ଲା ପ୍ରଶାସନ ଜରିଆରେ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟରେ ସ୍ମାରକ ପତ୍ର ପ୍ରଦାନ କରାଯିବ ଏବଂ ତା ୨୨.୦୬.୧୭ ରିଖରେ ଭୁବନେଶ୍ବର ଠାରେ ପ୍ରତିବାଦ ଶୋଭା ଅନୁଷ୍ଠିତ ହେବ | ପରବର୍ତ୍ତୀ ଅବସ୍ଥାରେ ସନାତନ ହିନ୍ଦୁ ଧର୍ମର ରକ୍ଷା ପାଇଁ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ନବୀନ ପଟ୍ଟନାୟକଙ୍କ ସଦ୍‌ବୁଦ୍ଧି ଉଦୟ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟରେ ଏକ ଯଜ୍ଞ ଅନୁଷ୍ଠିତ କରାଯିବାର କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ମଧ୍ୟ ରହିଅଛି ।ଯେଉଁଥିରେ କି ସାରା ରାଜ୍ୟରୁ ୧୦ହଜାର ପାଖାପାଖି ଆଦିତ୍ୟ ବାହିନୀର କର୍ମକର୍ତ୍ତା ଯୋଗ ଦେବେବୋଲି ଆଶା କରାଯାଉଛି।
ପୁରୀର ଭାଇମାନଙ୍କୁ ନିବେଦନ ସନାତନ ହିନ୍ଦୁ ଧର୍ମକୁ ବିଲୋପ କରିବାକୁ ପ୍ରୟାସ ଜାରି ରଖିଥିବା ରାଜ୍ୟ ସରକାରଙ୍କ ଆଭିମୁଖ୍ୟ ସମ୍ପର୍କରେ ଜନସାଧାରଣଙ୍କୁ ସଚେତନ କରିବା ସଙ୍ଗେ ସଙ୍ଗେ ଆଦିତ୍ୟ ବାହିନୀକୁ ସହଯୋଗ କରନ୍ତୁ

शंकराचार्य जी का शासनतंत्र को निर्देश

किसानों द्वारा आत्महत्या के सन्दर्भ में पूरी शंकराचार्य जी का शासनतंत्र को निर्देश

सद्भावपूर्ण सम्वाद के माध्यम से सैद्धान्तिक सामंजस्य साधने में शासनतंत्र की असमर्थता के कारण किसान आत्महत्या करने के लिए बाध्य होते हैं और उग्र आंदोलन कर मृत्यु के ग्रास बनते हैं । शासनतंत्र का यह दायित्व है कि, वह राष्ट्र के उत्कर्ष की भावना से सनातन परम्परा प्राप्त कृषि विज्ञान की उपयोगिता को समझ कर अविलंब उसे क्रियान्वित करें । कृषि, गौरक्ष्य और वाणिज्य तथा लघु उद्योगको अर्थ का स्रोत समझ कर इन्हें सुव्यवस्थित करें ।

-पूर्वाम्नाय श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज

श्री जगदीश रथयात्रा एवं चातुर्मास्यव्रत-निमंत्रण पत्र

श्री जगदीश रथयात्रा एवं चातुर्मास्यव्रत-निमंत्रण पत्र

गोवर्धन मठ पुरीपीठ,

श्री शंकराचार्य मार्ग,पूरी,ओडिशा

सम्माननीय सन्त तथा भक्तवृन्द,

सस्नेह स्मरण तथा सादर अभिनंदन ! निम्नलिखित कार्यक्रमोंमें आप सादर तथा सानन्द आमंत्रित हैं ।

श्री जगदीश्वर रथयात्रा महोत्सव

विदित हो कि इस वर्ष श्री बलभद्र और भगवती शुभद्रासहित महाप्रभु श्रीजगन्नाथजीकी रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया,वि.सं.२०७४ रविवार  तदनुसार 25th June-2017 को प्रारंभ होगी । इस महोत्सव में सम्मिलित होकर आप प्रमुदित हों तथा पुण्य के भागी बनें ।

चातुर्मास्यव्रत महोत्सव

युधिष्ठिर संवत २६३१ तदनुसार ई. सन् से ५०७ वर्ष पूर्व वैशाख शुक्ल पंचमी रविवार को भगवाद्पाद श्री शिवस्वरूप आदि शंकराचार्य अवतीर्ण हुए । उन्होंने अपने चिन्मय करकमलों से युधिष्ठिर संवत २६५५ तदनुसार ई. सन् से ४८३ और सन् २०१७ से २५०० वर्ष पूर्व वैशाख शुक्लदशमी को ऋग्वेदी पूर्वाम्नाय श्री गोवर्धन मठ पूरी पीठ के प्रथम शिष्य श्रीपद्मपाद महाभाग को प्रतिष्ठित तथा अभिषिक्त किया एवं मूर्ति भंजकों के शासन काल में अदृष्टिगोचर श्री जगन्नाथादि चतुर्व्यूहको पुरुषोत्तम क्षेत्र श्रीमंदिर पूरी में पुनः प्रतिष्ठित किया । श्री पद्मपादाचार्य महाभागकी प्रशस्त परंपरा में 145 वें श्रीमदज्जागदगुरु  शंकाराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वतीजी महाराज इस वर्ष आषाढ़ शुक्ल 15 गुरुपूर्णिमा वि.सं. २०७५ से भाद्र शुक्ल १५ रविवार,तदनुसार ६ सितंबर २०१७ पर्यन्त श्री गोवर्धन मठ -पूरी पीठ पूरी में चातुर्मास्य व्रत सम्पन्न करेंगे । इस अवसर पर आप अपने सुविधानुसार समुपस्थित होकर महोत्सव की शोभा बढ़ावें ,ऐसी भावना हैं ।

दैनिक कार्यक्रम

-प्रातः 10.00-12.00-छान्दोग्य उपनिषद्, बृहदारण्यक उपनिषद्-शांकरभाष्य-आनंदगिरि विरचित टीका सहित अध्यापन

-सायं 4.30-06.00-श्रीमद्भागवत कथा

-रात्रि 8.00-9.00-ब्रह्मसूत्र – भामतीटीका सहित अध्यापन

केरल में हुई गोहत्या के विरोध में जगद्गुरु शंकराचार्य

केरल में हुई गोहत्या के विरोध में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वतीजी का मधुपुर,झारखण्ड से राजनैतिक दलों को चुनोती…
मूर्तिभंजको के शासनकाल में श्रीजगन्नाथ आदि का दर्शन सुलभ नहीं था , भगवत्पाद शंकराचार्य महाभाग ने २५०० वर्ष पूर्व वैशाख शुक्ल पंचमी के दिन अपने चिन्मय करकमलों से श्री जगन्नाथ आदि को पुनः प्रतिष्ठित किया !

बदरीवन में श्री बदरीनाथजी का दर्शन सुलभ नहीं था – जिन्होंने अपने चिन्मय करकमलों से बदरीनाथ जी को पुनः प्रतिष्ठित किया – भारत को पुनः वृहद् भारत का रूप जिन्होंने दिया – भारत को सुरक्षित , मठमंदिरों को सुरक्षित रखने के उन आदिशंकराचार्य ने क्या नहीं किया और बौद्धिक धरातल पर उन्होंने जो दर्शन दिया , भाष्य दिया उस पर पूरा विश्व ही नहीं , सारे वैज्ञानिक भी लट्टू है !

जिस प्रान्त में आदिशंकराचार्यजी ने जन्म लिया – उस प्रान्त के दीवाने , राजनैतिकदल के उद्दण्ड युवक घोषणा पूर्वक सबके सामने गाय को काटते है तो हम कैसे समझें भारत स्वतंत्र है , कोई भी हो , कोई राजनैतिकदल हो जिसे भारत में गोहत्या प्यारी है , उस राजनेता को , उस राजनैतिकदल पर प्रतिबन्ध लगना चाहिए , उसे चुनाव लड़ने का ही नहीं भारत में रहने का अधिकार भी नहीं मिलना चाहिए , ऐसे अत्याचारियों को हम नहीं सह सकते !

और उलटी बात – गोभक्तो को गुण्डा कहा जाता है और और गोहत्यारों को राष्ट्रभक्त कहा जाता है !

जो राजनेता , जो नागरिक , जो राजनैतिकदल गुप्त या प्रकट रूप से गोहत्या का समर्थन करते है – उन्हें भारत की नागरिकता से वंचित करना चाहिए वह भारत का नागरिक नहीं देशद्रोही है , उन्हें भारतमें रहने का अधिकार नहीं !

अब हम उस नीति को जन्म देंगे – जहाँ शांतिपूर्वक , मानवाधिकार की सीमा में , जहाँ गोभक्तो की विजय होगी , गोवंश की रक्षा होगी , बंगाल में हमारे मानबिदुओं की रक्षा होगी !

भारत स्वतंत्र है क्या ??

भारत की शिक्षा पद्धति हमारी अपनी नहीं , रक्षा की प्रणाली हमारी अपनी नहीं , भारत में कृषि , गोरक्ष , वाणिज्य के प्रकल्प हमारे अपने नहीं , सेवा के प्रकल्प , उद्धोग के प्रकल्प हमारे अपने नहीं है और धीरे धीरे ब्राहमण , क्षत्रिय , वैश्य व् शुद्र के बीज भी अब हमारे अपने रहने वाले नहीं है , इससे घोर दासता , परतंत्रता और क्या हो सकती है !

आप यह मत समझिये कि हम मौन है , हम कौन है ?

एक समय हमने नारद के रूप में हिरन्यकशीपु को रसातल में पहुँचाने के लिए उसी के बेटे प्रहलाद को खड़ा किया , यह हमारी परंपरा है !

एक समय हमने भृगु महर्षि के रूप में बेन के आतंकपूर्ण शासन को उच्छिन्न करके पृथु को राजा बनाया था !

हम वो है जिसने वशिष्ठ के रूप में अत्याचारों को ख़त्म करने के लिए , रावण को रसातल में पहुँचाने के लिए भगवान् राम को प्रकट किया था !

हम वो है जो धौम्यऋषि के रूप में , मैत्रेयऋषि के रूप , वेद व्यासजी के रूप में श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर को प्रकट करके कंस और दुर्योधन के शासन को रसातल में पहुँचाया , हमने चाणक्य के रूप में चन्द्रगुप्त को आगे करके अभिमानियो के शासन को उच्छिन्न किया !

आज भी व्यासपीठ में वह बल है , वह सामर्थ्य है !

मै फिर घोषणा करता हूँ जिसको गोहत्या प्यारी हो , वो किसी प्रान्त के मुख्यमंत्री हो , भारत का प्रधानमंत्री रहा हो या हो , मै नहीं जानता – अगर गोहत्या का कोई गुप्त या प्रकट समर्थक है – भारत को खाली करें , उसे भारत की नागरिकता नहीं मिलनी चाहिए , जो गति वह गायों को दे रहा है , वह गति उसे मिलनी चाहिए और अगर ऐसा नहीं होता है तो भारत गोभक्तो का होगा , गंगा के भक्तो का होगा , आर्यों का होगा , सैद्धांतिक तौर पर भारत की रक्षा होगी !

!! हर हर महादेव !!