कश्मीरी पंडितों को न्याय मिले


अनन्त श्री विभूषित श्री ऋगवैदिय पूर्वाम्नाय गोवर्धनमठ पुरीपीठाधिश्वर श्रीमज्जगदगुरु शंकराचार्य भगवान के काश्मीरी पंडितों पर अमृतवचन :-

केवल बाल ठाकरे जी ने बहुत से काश्मीरी विस्थापितों की सेवा का प्रकल्प चलाया | जम्मू में आज भी तम्बू में तीन-तीन पीढ़ी से कष्ट पा रहें हैं २६ वर्षों की अवधि से | काश्मीरी विस्थापित उनके नाम पर राजनीति तो की जा रही है , लेकिन उन्हें सुविधा,सम्मान,स्नेहपूर्वक काश्मीर में बसाने की कोई योजना नहीं है | जम्मू के व्यक्ति की सहानुभूति भी काश्मीरी पंडितों के लिए नहीं है , उसके पीछे कारण है… गन्धर्व के समान सुन्दर दिखने वाले काश्मीरी , बौद्धयोग्य काश्मीरी जब विस्थापित होके जम्मू में आये तब तम्बू में , एक छोलदारी दस-दस व्यक्ति को रखा गया | उनको सर्प ने डसा , गर्मी के चपेट में आ कर मरते गए … पेट पालने के लिए वो दस हजार की नौकरी वो एक हजार रुपये महीने में करने के लिए वाध्य हुए | जम्मू के व्यक्तियों ने सोचा ये ना आते तो दस हजार रुपये हमको मिलते | इनके कारण इनको वो नौकरी एक हजार रुपये में मिल रही है, इसीलिए जम्मू के हिन्दुओं की सहानुभूति भी काश्मीरी पंडितों को प्राप्त नहीं हो सकी | लगभग डेढ़ महीने पहले मैंने वक्तव्य दिया था की सुब्रमण्यम स्वामी ने मेरा नाम लिए बिना उसका कुछ अंश उधृत किया था.. पचास किलोमीटर का एक जिलास्तरीय क्षेत्र कम से कम विस्थापित काश्मिरियों को सुविधापूर्वक , स्नेहपूर्वक , सम्मानपूर्वक , सुरक्षापूर्वक सौपा जाए और काश्मीर को बचाने के लिए जो अवकाश प्राप्त विश्वासपात्र और स्वस्थ सैनिक हैं जिन्होंने काश्मीर में मोर्चा सम्भाला उनको काश्मीर में बसाया जाय , भविष्य में भी जो काश्मीर से अवकाश प्राप्त करने वाले सैनिक राष्ट्रभक्त हों , स्वस्थ हों उनको बसाने का प्रकल्प चलाया जाय | जिस प्रकार चम्बल घाटी का दस्यु का उन्मूलन हो गया क्योंकि चम्बल घाटी में जो लोग रहते थे उनको डरा कर , उनकी गरीबी का लाभ उठाकर दस्युलोग प्रश्रय प्राप्त करते थे | जब उत्तर-प्रदेश और मध्यप्रदेश के शासनतंत्र ने चम्बल की घाटी में रहने वाले जो व्यक्ति व्यक्ति के परिवार ,उनके स्वास्थ्य का शिक्षण का स्वावलंबन का प्रकल्प चलाया तो अपने आप चम्बल से दस्युकांड समाप्त हो गया | इसी प्रकार जो राष्ट्रभक्त काश्मीर की सीमा पर रहतें हैं जिनको डराकर, धमकाकर या जिनको मनाकर अराजक तत्व कार्य करतें हैं उन्हें यदि स्वावलंबी बनाया जाए, सुबुद्ध बनाया जाय, सुरक्षित बनाया जाय तो काश्मीर की समस्या का समाधान सुगमतापूर्वक हो सकता है | साथ ही साथ एक सुझाव हमने यह भी दिया है आतंकवादियों के वाहन के कोई रंग विशेष नहीं होते , आतकवादियों का वेश कोई सुनिश्चित नहीं होता है जबकि हमारे सैनिक के वेश निश्चित होतें हैं , वाहन के रंग निश्चित होतें हैं वो झट से बाहन भी पकड़ में आ जातें हैं की ये भारतीय सैनिकों का बाहन है , सैनिक भी पकड़ में आ जातें हैं और भुन दियें जातें हैं इसीलिए सिविल भेष में , कोई निश्चित रंग का बाहन ना हो इस ढंग का प्रकल्प अगर काश्मीर में चलाया जाय तो आतंकवादियों का सुगमतापूर्वक निग्रह हो सकता है | साथ ही साथ हम एक संकेत करना उचित समझतें हैं की जम्मू काश्मीर में जो पार्टी शासन चलावे उसे अच्छी प्रकार से परखने की आवश्यकता है की वो भारत के प्रति आस्थान्वित है की नहीं | जम्मू काश्मीर को लेकर जब आतंकवाद चला था सबसे पहले हमारे पूर्वाचार्य जो की पद पर थे उनके शिष्य के बेटे को ही निशाना बनाया गया था, मुझे अच्छी तरह पता है उनको घायल किया गया वो जीवित रह गए | सबसे पहले जो ब्राम्हानोचित ढंग से जो जीविका अर्जित करते थे उनको निशाना बनाया आतंकवादियों ने , वे जब मार दिए गए या वहां से भागने के लिए वाध्य कर दिए गए उसके बाद भारत के प्रति आस्थान्वित जो व्यक्ति थे , जो स्वयं को भारतीय समझते थे उनको मारा गया , लेख के द्वारा , वाणी के द्वारा जो भारत के पक्षधर सिद्ध हुए उनको मार दिया गया | उसके बाद मूक रहकर भी जो भारत के प्रति अपनत्व रखने वाले थे उनको जीप में पीछे बांधकर रोड पर घसीट घसीट कर मारा गया | राज्यपाल पलायन कर गए , शासनतंत्र मूक रह गया ……… उस परिस्थिती में काश्मीरी व्यक्ति घर छोड़कर भागने के लिए वाध्य हुए | जो स्वर्ग कहा जाता था .. भूलोक का.. केसर के जहां बाग़ के बाग़ थे और भव्य सेव इत्यादि के बाग़ थे और काश्मीरी पंडितों के यहाँ एक-एक हजार , चार सौ वर्ष के अद्भुत, दिव्य,अनुपम, अन्यत्र अनुपलब्ध ग्रंथागार थे उन सब को नष्ट किया गया | कितने ही शाशन उन 26 वर्षों में भारत में केंद्र में आया, प्रांत में आया …… उनके नाम पर बहुत कुछ वोट माँगा गया, लेकिन किसी ने कश्मीरियों का कष्ट नहीं समझा उन्हें दूर करने का प्रयास नहीं किया | वोट बैंक की कुत्सित राजनीति ने काश्मिरियों की पूर्ण उपेक्षा की है | मैं जम्मू तक गया हूँ , राजौरी तक … चंद्रप्रकाश जौदियाल जी ने कई बार कार्यक्रम बनाया, आगे हमने जम्मू जाना छोड़ा , राजौरी जाना छोड़ा.. उसका कारण क्या था ? वहां के व्यक्ति इतने डरे भुने की वहां से संकेत आया की राष्ट्र पर कुछ मत बोलिए, भगवान की कथा कहिये ,भगवान के नाम पर हंसाइये रुलाइये लेकिन राष्ट्र के नाम पर कुछ मत कहिये.. कुछ ऐसी ध्वनी आई क्योंकि आप राष्ट्र पर बोलकर चलें जायेंगे और कल हम भुन दियें जायेंगे | आपका कुछ होगा या नहीं , आपके नाम हम मारे जायेंगे | फिर एक संकेत आया , बिना बोले ही हमलोग संकेत समझ जातें हैं की भारत सरकार ये मानकर चलती है काश्मीर नया पाकिस्तान बनेगा या पुराने पाकिस्तान में बिलीन होगा | ऐसी स्थिती में अब जम्मू के व्यक्ति भी पलायन की स्थिति से कुछ धन बटोर रहें हैं की कल अगर हमें जम्मू को छोड़कर भागना पड़े तो कैसे किसी क्षेत्र में जा कर के जीवित रहेंगे ! स्थिति यहीं तक नहीं है , अमृतसर की स्थिति ये है … भले ही पंजाब के व्यक्तियों को ये सब पता ना हो | चंद्रप्रकाश जैडियाल जी आदि जानतें हैं मैं पंजाब में जाता हूँ तो लोगों को बैठा के ऐसे थोड़े सुनता हूँ लेकिन पता मुझे लग ही जाता है | चंद्रप्रकाश जी इत्यादि बताते भी नहीं हैं, उनको भी ये सब मालुम नहीं हैं अन्दर की चीजें , sp और कलेक्टर तक को नहीं मालुम है ये सब चीजें.. अब परिस्थिति ये हो गयी है हमने जो आकलन किया है अमृतसर का .. पंजाब के अन्दर पंजाब के अधिकाँश सुबुद्ध व्यक्ति भी ये समझ रहें हैं की पंजाब को छोड़कर आज ना सही कल हमको पलायन करना ही है भारत के किसी अन्य क्षेत्र में या कुछ विधर्मी सरीखा या विधर्मी होकर रहना है | वो भी अन्दर से ये मानकर चलें हैं की पंजाब भी बिलकुल हमारे रहने योग्य , हिन्दुओं के रहने योग्य नहीं रह गया है | ये पलायन का काण्ड कब तक चलेगा ? लेकिन केंद्र में जो भी शासनतंत्र आता है उन्मत्त हो जाता है | नेहरू जी के शैली में केवल प्रशस्ति प्राप्त करने के लिए मियाँ की दौर मस्जिद तक | विदेश तक दौड़ने के बाद नाम कमाने के चक्रव्यूह में , चुनाव जीतने के भावना में जुट जाता है | सचमुच अगर देश के प्रति अपनत्व हो सबसे पहले विस्थापित कश्मीरियों की समस्या को दूर करने की आवश्यकता है | और जब हमने कहा था की नेपाल को संभालो भारतीयों… बहुत से संतो ने कहा की भारत तो सम्हाले नहीं संभालता नेपाल को क्या संभालेगी भारत सरकार ? मुझे मालुम है अगर नेपाल को हमने छोड़ दिया तो चीन नेपाल में अड्डा बनाकर हमको नहीं छोड़ेगा, बिहार तो अब चला गया , नेपाल के शिकंजे में बिहार तक आ गया | भारत के अन्य क्षेत्रों में घुस रहें हैं , लेकिन हमारी बात सरकार तो क्या सुनती राजगुरु जी जिनको दीक्षा भी दिलवाई इंदिरा झा जी ने वो भी लगता नहीं जीवित हैं , बेहोश हो गए … मने नेपालियों ने , एक भी नेपालियों ने हमारा साथ नहीं दिया जबकि नेपाल को हिन्दुराष्ट्र के रूप में पुनः उद्भाषित करने का अभियान इसी पीठ से चला था | आज जो माननीय मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश के हैं आदित्यनाथ योगी वो अच्छी प्रकार से इस बात को जानतें हैं, मुख्यमंत्री बनने के बाद उनको नेपाल से एक सभा में बुलाने का निमंत्रण आया उन्होंने कहा पूरी के शंकराचार्य आयेंगे तभी मैं आउंगा अन्यथा नहीं आउंगा | इतना तो वो जानतें हैं लेकिन मुझे कष्ट यह है की नेपाल में 52.. 54 केवल जिलें हैं वहां प्रांत तो होता नहीं , जनसंख्या की दृष्टि से छोटा सा राज्य है | लेकिन एक-एक जिले में दस-दस नेता हिन्दू राष्ट्र बनाने वाले हैं , एक-एक के पास दस-दस व्यक्ति मुश्किल से हैं , मुझे ही श्रेय मिले ,श्रेय पाने के व्यामोह में कम्युनिस्ट आदि वहां पर शासन कर रहें हैं मतलब हिन्दू ही हिन्दुओं के घातक नाम कमाने के नाम पर हो जातें हैं | अब नेपाल की दुर्गति भारत को ही भोगनी पड़ेगी तो बहुत परिस्थिती खराब है | काश्मीर के बारे में हमने सांकेतिक अश्विनी कुमार आदि काश्मीरी पंडितों से संपर्क स्थापित किया … रोंगटे खड़े कर देने वाले तथ्य सामने आये | काश्मीर से पलायन किये हुए जो कश्मीरी हैं वे ही गुप्तचर बना दिए गएँ हैं काश्मीरी पंडितों के उत्कर्ष में अवरोध डालने के लिए | सरकार ने उनमें ही ऐसी फुट डाल दी है की वो आपस में लड़कर के गुप्तचरी काण्ड में मर जाएँ अर्थात सरकार देखती है की इनमें से नेता होने योग्य कौन है, काश्मिरियों की आंसू पोछने के लिए नेता होने योग्य कौन है.. जो नेता होने योग्य है उसको फोड़ लो, लोभ दो , भय दो , आँख में पट्टी दाल दो शिकंजे … इसीलिए मैंने अब काश्मीरी पंडितों पर हाथ रखना छोड़ दिया , इसीलिए की मैंने देख लिया की ये तो फुट के चक्रव्यूह में आ गए , शासनतंत्र ने इनके आंसू पोछने के नाम पर इनको ही इनके घात में लगा दिया है, तो बहुत दुर्नीति शासनतंत्र की रही है | केन्द्रीय शासनतंत्र अगर सोच समझकर सहृदयता का परिचय दे तो काश्मीर की रक्षा हो सकती है |

हर ! हर ! महादेव !!!