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नीतिनिधि

मान्यवर पाठकवृन्द! सादर तथा सस्नेह स्मरण और अभिनन्दन। विश्वहृदय भारतमें धर्मनियत्रित पक्षपातविहीन शोषणविनिर्मुक्त सर्वहितप्रद सनातन शासनतत्रकी स्थापना अपेक्षित है। नीति तथा अध्यात्मविहीन  वर्तमान  शिक्षा  तथा जीविका – पद्धति  देहात्मवादकी  जननी है। इसके कारण महानगरोंके माध्यमसे संयुक्त परिवारका विलोप दृष्टिगोचर है।  संयुक्त परिवारके विलोपके फलस्वरूप कुलधर्म, कुलदेवी, कुलदेवता, कुलगुरु, कुलवधू, कुलवर, कुलपुरुषका द्रुतगतिसे विलोप परिलक्षित  है। […]

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Memorandum of Aditya Bahinee to the Hon’ble Chief Minister

“ଶ୍ରୀ ହରି” ଶ୍ରୀ ଗଣେଶାୟ ନମଃ । ଜଗଦ୍‌ଗୁରୁ ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ସ୍ବାମୀ ନିଶ୍ଚଳାନନ୍ଦ ସରସ୍ବତୀ ମହାରାଜଙ୍କ ଦ୍ବାରା ଗଠିତ ସର୍ବଭାରତୀୟ ସେବା ସଂସ୍ଥା “ଆଦିତ୍ୟ ବାହିନୀ” ଓଡିଶା ଶାଖା ତରଫରୁ ଜଗଦ୍‌ଗୁରୁ ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ତଥା ଗୋବର୍ଦ୍ଧନ ମଠ(ଶଙ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ପୀଠ) ପ୍ରତି ସରକାରଙ୍କ ନିମ୍ନୋକ୍ତ ଅବହେଳା ପୂର୍ବକ ଦମନ ନୀତି ବିରୁଦ୍ଧରେ ରାଜ୍ୟବ୍ୟାପୀ ପ୍ରତିବାଦର ସ୍ବର ଉତ୍ତୋଳନ ପାଇଁ ସ୍ଥିର କରାଯାଇଛି । ୧. ଓଡିଶା ଜନସାଧାରଣ ଜଗନ୍ନାଥ ସଂସ୍କୃତି ଓ ପରମ୍ପରା ସହିତ ଜଡିତ ଥିବାବେଳେ ୨୫୦୦ […]

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शंकराचार्य जी का शासनतंत्र को निर्देश

किसानों द्वारा आत्महत्या के सन्दर्भ में पूरी शंकराचार्य जी का शासनतंत्र को निर्देश सद्भावपूर्ण सम्वाद के माध्यम से सैद्धान्तिक सामंजस्य साधने में शासनतंत्र की असमर्थता के कारण किसान आत्महत्या करने के लिए बाध्य होते हैं और उग्र आंदोलन कर मृत्यु के ग्रास बनते हैं । शासनतंत्र का यह दायित्व है कि, वह राष्ट्र के उत्कर्ष […]

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श्री जगदीश रथयात्रा एवं चातुर्मास्यव्रत-निमंत्रण पत्र

श्री जगदीश रथयात्रा एवं चातुर्मास्यव्रत-निमंत्रण पत्र गोवर्धन मठ पुरीपीठ, श्री शंकराचार्य मार्ग,पूरी,ओडिशा सम्माननीय सन्त तथा भक्तवृन्द, सस्नेह स्मरण तथा सादर अभिनंदन ! निम्नलिखित कार्यक्रमोंमें आप सादर तथा सानन्द आमंत्रित हैं । श्री जगदीश्वर रथयात्रा महोत्सव विदित हो कि इस वर्ष श्री बलभद्र और भगवती शुभद्रासहित महाप्रभु श्रीजगन्नाथजीकी रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया,वि.सं.२०७४ रविवार  तदनुसार 25th June-2017 को […]

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दारुब्रह्म

श्रीपुरुषोत्तमक्षेत्र पुरीमें नीलमहोदधिके तटपर नीलाद्रिके सन्निकट श्रीजगन्नाथादि दारुब्रह्म प्रतिष्ठित हैं। ऋग्वेदने दो ऋचाओंके माध्यमसे उनका यशोगान किया है – “अदो यद्दारुप्लवते  सिन्धो: पारे अपूरुषम् । तदारभस्व  दुहणो   तेन  गच्छ  परस्तरम्।। (ऋग्वेद 10. 155. 3) , यत्र    देवो   जगन्नाथ:   परपारं  महोदधे:। बलभद्र:  सुभद्रा  च तत्र  माममृतं   कृधि।। (ऋग्वेदपरिशिष्ट )” । नीलगगनमें सन्निहित नीलशब्द गम्भीरता तथा अनन्तताका […]

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